नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोरोना वायरस को महामारी घोषित करने के बाद दनिया भर के बाजारों में हई भारी गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजारों में भी देखा गया और शरुआती कारोबार के दौरान निवेशकों के आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए। वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल- पुथल के बीच 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2459 अंक प्रतिशत टूट कर 33,237.48 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार के पतन के चलते निवेशकों की करीब 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बीएसई सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बुधवार को कारोबार खत्म होने पर 137 लाख करोड़ रुपये था, जो गुरुवार को सुबह साढ़े 10 बजे तक घटकर 128 लाख करोड़ रुपये रह गया। व्यापारियों ने कहा कि वैश्विक रुख के अलावा विदेशी फंड के लगातार बाहर जाने के चलते निवेशकों की भावनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ा शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को सकल आधार पर 3,515.38 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई में 1,789 शेयरों में गिरावट आई, जबकि सिर्फ 152 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82 पैसे की भारी गिरावट के साथ 74.50 रुपये पर आ गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नए ' कोरोनोवायरस (कोविड19)को महामारी घोषित कर दिया है, जिसके बाद दुनिया भर के बाजारों में कमजोरी देखी गई और इसका भारी असर घरेलू मुद्रा बाजार पर भी हुआ। कारोबारियों ने बताया कि बाजार के प्रतिभागियों ने कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते आर्थिक मंदी गहराने की आशंका के चलते भारी बिकवाली की। उन्होंने बताया कि घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोर शुरुआत हुई और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रोमानियाल बना। रुपया बुधवार को अमेरिकी - डॉलर के मुकाबले 73.68 के भाव पर बंद हुआ था। हालांकि, विदेशी बाजार में अमेरिकी मद्रा केकमजोर पड़ने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को थोड़ा सहारा मिला, लेकिन व्यापारियों का मानना है कि कोरोना वायरस के प्रकोप के गणपण्व अर्थरावस्थानों में मंदी की आशंका बढ़ गई है।
शेयर बाजार में तबाही से चंद घंटों में निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक डूबे